Trump Gold Card और Platinum Card अमीरों के लिए अमेरिका में बसने का नया रास्ता

Trump Gold Card और Platinum Card अमेरिका में स्थायी निवास का नया विकल्प

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमीर निवेशकों के लिए अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और टैक्स बेनिफिट्स लेने का एक नया रास्ता खोला है। इसके तहत Trump Gold Card लॉन्च किया गया है, जबकि Platinum Card अभी योजना के चरण में है। दोनों कार्ड मुख्यत हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) को लक्षित करते हैं।


Trump Gold Card प्रमुख फीचर्स और प्रक्रिया

  • निवेश आवश्यकता अमेरिकी खजाने में कम से कम $10 लाख (₹880 करोड़) जमा करना होगा।
  • वीज़ा कैटेगरी EB-1 और EB-2 के अंतर्गत स्थायी निवास (Permanent Residency) मिल सकता है।
    • EB-1 वीज़ा विज्ञान, कला, शिक्षा, बिज़नेस या खेलों में असाधारण प्रतिभा रखने वाले व्यक्तियों, उत्कृष्ट प्रोफेसर/शोधकर्ता या मल्टीनेशनल मैनेजर्स/एग्जीक्यूटिव्स के लिए।
    • EB-2 वीज़ा अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ और एम्प्लॉयर-स्पॉन्सर्ड जॉब ऑफर वाले प्रोफेशनल्स के लिए।
  • आवेदन प्रक्रिया
    • आधिकारिक वेबसाइट trumpcard.gov पर आवेदन।
    • नॉन-रिफंडेबल प्रोसेसिंग फीस।
    • USCIS द्वारा बैकग्राउंड चेक।
    • अप्रूवल के बाद सभी 50 स्टेट्स और टेरिटरीज में वैध कार्ड इश्यू होगा।
  • टैक्स नियम Gold Card धारकों को अमेरिकी रेज़िडेंट्स की तरह टैक्स देना होगा।

Corporate Gold Card

  • कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए $20 लाख निवेश कर स्पॉन्सर कर सकती हैं।
  • स्टाफ बदलने पर भी कार्ड को दोबारा असाइन (Re-assign) करने का विकल्प।

Trump Platinum Card टैक्स-फ्री आय का प्रीमियम विकल्प

  • खर्च $50 लाख निवेश।
  • रहने की अवधि एक वर्ष में अधिकतम 270 दिन अमेरिका में रह सकते हैं।
  • टैक्स बेनिफिट अमेरिका में कमाई पर कोई इनकम टैक्स नहीं
  • अलॉटमेंट First Come, First Serve आधार पर दिया जाएगा।

Gold Card बनाम Platinum Card: तुलना

विशेषताGold CardPlatinum Card
निवेश राशि$10 लाख$50 लाख
टैक्स नियमसामान्य टैक्स लागूटैक्स-फ्री आय
उपलब्धताजारीयोजना में
लक्ष्य समूहHNI निवेशकसुपर-HNI निवेशक

निष्कर्ष

Trump Gold Card और Platinum Card, दोनों ही अमेरिका में स्थायी निवास और बिज़नेस अवसरों के लिए बनाए गए हैं। Gold Card अपेक्षाकृत सस्ता है लेकिन उस पर टैक्स देना होगा, जबकि Platinum Card टैक्स-फ्री आय का फायदा देता है, पर इसकी लागत काफी अधिक है। औसत निवेशकों के लिए यह रास्ता संभव नहीं है, लेकिन HNI और Ultra-HNI वर्ग के लिए ये आकर्षक विकल्प साबित हो सकते हैं।

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