US–Iran Tension से Global Market में हड़कंप, Indian Stock Market में भारी गिरावट

US–Iran Tension से Global Markets में घबराहट

दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में इस समय अस्थिरता बढ़ती जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते geopolitical tension ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है।

इस तनाव का असर सबसे पहले global commodities market में देखने को मिला, जहां कच्चे तेल की कीमतें अचानक तेज़ी से बढ़ गईं।

Crude oil prices 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने के बाद निवेशकों में जोखिम को लेकर चिंता बढ़ गई। इसका सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ा और कई प्रमुख वैश्विक इंडेक्स दबाव में आ गए।


भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट

वैश्विक बाजारों में गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ नजर आया।

कारोबार के दौरान BSE Sensex और Nifty 50 दोनों में तेज बिकवाली देखने को मिली।

हालांकि निचले स्तरों से थोड़ी रिकवरी जरूर आई, लेकिन इसके बावजूद Nifty 50 करीब 500 अंक से ज्यादा गिरकर 23,900 के नीचे पहुंच गया।

इस गिरावट ने यह संकेत दिया कि निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं।


Bank Nifty 200 DMA के नीचे

तेज बिकवाली के कारण बैंकिंग सेक्टर भी दबाव में आ गया।

Nifty Bank में करीब 2000 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही यह इंडेक्स पिछले साल अप्रैल के बाद पहली बार 200 DMA (200 Day Moving Average) के नीचे फिसल गया।

यह तकनीकी रूप से एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है क्योंकि 200 DMA अक्सर लंबी अवधि के ट्रेंड को दर्शाता है।


Midcap और Smallcap Stocks में भी कमजोरी

सिर्फ large cap कंपनियां ही नहीं, बल्कि broader market भी दबाव में नजर आया।

  • Midcap Index लगभग 3% तक गिर गया
  • Smallcap Index में भी करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई

इससे यह साफ हो गया कि बाजार में बिकवाली व्यापक स्तर पर हो रही है।


Crude Oil में तेज़ी के बाद Profit Booking

ऊर्जा बाजार में पहले तेज़ उछाल देखने को मिला।

  • Brent Crude पहले 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया
  • इसके बाद profit booking के चलते यह करीब 106 डॉलर के आसपास आ गया

तेल की कीमतों में इस तरह की अस्थिरता अक्सर ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए चिंता का कारण बनती है।


Rupee पर दबाव, Dollar हुआ मजबूत

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय मुद्रा पर भी दबाव बढ़ गया।

Indian Rupee गिरकर ₹92.31 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया।

यह पिछले कारोबारी दिन की तुलना में लगभग 57 पैसे की कमजोरी दर्शाता है।

जब तेल महंगा होता है और डॉलर मजबूत होता है, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की मुद्रा पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है।


Auto Sector में बड़ी गिरावट

West Asia crisis के कारण semiconductor chip supply प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

इसका असर ऑटो सेक्टर के शेयरों पर भी पड़ा और कई बड़ी कंपनियों में तेज गिरावट देखी गई।

इन कंपनियों के शेयरों में 4% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई:

  • Maruti Suzuki
  • Mahindra & Mahindra
  • Tata Motors Passenger Vehicles

इसके अलावा

  • Bajaj Auto
  • Ashok Leyland
  • Bharat Forge
  • Eicher Motors
  • Samvardhana Motherson

भी करीब 4% से ज्यादा नीचे कारोबार करते दिखाई दिए।


AC Manufacturing Sector पर भी दबाव

ऊर्जा संकट का असर AC manufacturing companies पर भी पड़ता दिख रहा है।

PG Electroplast ने हाल ही में गैस सप्लाई संकट को लेकर अपडेट दिया था। इसके बाद कंपनी का शेयर 12% से ज्यादा गिरकर futures segment का top loser बन गया।

वहीं Amber Enterprises India का शेयर भी 5% से ज्यादा टूट गया


PSU Banks और NBFC Sector में बिकवाली

कमजोर बाजार और कुछ राज्य सरकारों द्वारा loan waiver policies की घोषणा के बाद बैंकिंग सेक्टर पर भी दबाव बढ़ गया।

Nifty PSU Bank में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई।

इन बैंकों के शेयरों में तेज गिरावट आई

  • Bank of Maharashtra
  • Punjab National Bank
  • Canara Bank

इसके अलावा NBFC सेक्टर में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।


Market Expert Anuj Singhal का विश्लेषण

मार्केट एक्सपर्ट Anuj Singhal के अनुसार बाजार में gap-down opening के बाद बहुत बड़ा अतिरिक्त मूव देखने को नहीं मिला।

उनके मुताबिक

  • Crude Oil 117 डॉलर से गिरकर लगभग 108 डॉलर तक आया
  • Rupee रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास स्थिर हुआ
  • Reliance Industries और कुछ IT शेयरों में मजबूती दिखी

जबकि

  • EMS stocks
  • PSU Banks
  • NBFC stocks

में भारी गिरावट दर्ज की गई।


Market Strategy निवेशकों के लिए क्या सलाह?

ऐसे volatile माहौल में विशेषज्ञ निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

Anuj Singhal के अनुसार

  • अभी market bottom पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए
  • short selling के लिए भी स्पष्ट संकेत का इंतजार करना बेहतर रहेगा

उनका मानना है कि मौजूदा गिरावट काफी हद तक geopolitical developments से जुड़ी है।

अगर अचानक कोई peace deal या बड़ा geopolitical announcement हो जाता है, तो बाजार में short covering rally भी देखने को मिल सकती है।

लेकिन फिलहाल बाजार में अनिश्चितता काफी ज्यादा बनी हुई है।

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