97 लाख पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग से भारत को होगा 40,000 करोड़ का फायदा नितिन गडकरी
भारत की Vehicle Scrapping Policy को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि अगर देश के सभी 97 लाख पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप किया जाता है, तो भारत को GST के रूप में ₹40,000 करोड़ का सीधा फायदा हो सकता है।
गडकरी का बयान – ACMA Annual Session 2025 में मुख्य बिंदु
- इस अभियान से सरकारी राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी।
- करीब 70 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी।
- अगले 5 सालों में भारत दुनिया का नंबर-1 ऑटोमोबाइल हब बन सकता है।
स्क्रैपिंग पॉलिसी की मौजूदा स्थिति
- अगस्त 2025 तक केवल 3 लाख वाहनों को ही स्क्रैप किया गया।
- इनमें 1.41 लाख सरकारी गाड़ियाँ शामिल थीं।
- औसतन हर महीने 16,830 वाहन ही स्क्रैप हो पा रहे हैं।
- प्राइवेट सेक्टर ने अब तक इस इकोसिस्टम को बनाने में करीब ₹2,700 करोड़ का निवेश किया है।

स्क्रैप सर्टिफिकेट से मिलेगी छूट
नितिन गडकरी ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से अपील की है कि –
- जो ग्राहक पुरानी गाड़ी स्क्रैप करके नया वाहन खरीदते हैं,
उन्हें कम से कम 5% की छूट दी जाए। - उन्होंने इसे दान (Donation) नहीं बल्कि डिमांड बढ़ाने का स्मार्ट तरीका बताया।
स्क्रैपिंग क्यों है ज़रूरी?
- ऑटो पार्ट्स की लागत 25% तक घट सकती है क्योंकि रीसाइकल्ड स्टील, एल्युमिनियम और अन्य मटीरियल सप्लाई चेन में वापस आएंगे।
- अनफिट वाहनों के हटने से प्रदूषण और ईंधन की खपत कम होगी।
- रोड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स बेहतर होंगे और सड़कों पर नई तकनीक वाली गाड़ियाँ दौड़ेंगी।
निष्कर्ष
अगर Vehicle Scrapping Policy को सही तरीके से लागू किया गया, तो इससे न केवल सरकार को भारी GST राजस्व मिलेगा बल्कि देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को नई रफ्तार भी मिलेगी। साथ ही, यह कदम रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा के लिए भी अहम साबित होगा।
