Zerodha के को-फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके एक सहकर्मी ने 3,100 अलग-अलग स्टॉक्स में निवेश किया है — यह संख्या पहले की तुलना में 1,000 स्टॉक्स ज्यादा है (पहले 2,100 स्टॉक्स थे)।
डाइवर्सिफिकेशन का ‘Logical Extreme’ क्या होता है?
कामथ ने इसे डाइवर्सिफिकेशन का लॉजिकल एक्सट्रीम कहा।
इसका मतलब है—
एक सही और समझदारी वाले आइडिया (जैसे Diversification) को इतना आगे बढ़ा देना कि वह असामान्य या अत्यधिक लगने लगे।
आमतौर पर निवेशक 10, 20 या 50 स्टॉक्स तक पोर्टफोलियो बनाते हैं, लेकिन 3,100 स्टॉक्स तक निवेश फैलाना बेहद असामान्य है।

क्यों यह संख्या चौंकाती है?
नितिन कामथ ने यह तुलना बताकर स्पष्ट किया कि
- आज BSE पर कुल 4,244 स्टॉक्स ट्रेड हुए
- NSE पर 3,136 स्टॉक्स ट्रेड हुए
इसका मतलब—
एक निवेशक ने लगभग पूरे भारतीय मार्केट के बराबर स्टॉक्स खरीद लिए, जो डाइवर्सिफिकेशन को एक अत्यधिक स्तर पर ले जाता है।
इस तरह का पोर्टफोलियो बनाना कितना व्यावहारिक?
- इतने बड़े पोर्टफोलियो को ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है
- रिटर्न और जोखिम पर इसका प्रभाव सामान्य से अलग हो सकता है
- यह अत्यधिक Diversification है, जो कई बार रिटर्न को औसत बना देता है
फिर भी, यह उदाहरण दिखाता है कि कुछ निवेशक पोर्टफोलियो निर्माण में नए और अनोखे प्रयोग कर रहे हैं।
