आज मार्केट में तेजी के प्रमुख कारण

आज मार्केट में तेजी के प्रमुख कारण

FII-DII डेटा विदेशी निवेशकों की वापसी

लंबे समय की बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों (FII) का रुख अब बदलने लगा है।
24 अक्टूबर 2025 को FII ने ₹621 करोड़ के भारतीय इक्विटी खरीदे, जबकि DII ने ₹173 करोड़ के शेयर खरीदे।
साल 2025 में अब तक FII ने 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की है, जबकि DII ने 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की है।

यह डेटा बताता है कि घरेलू निवेशक लगातार भारतीय बाजार को सपोर्ट दे रहे हैं, और विदेशी निवेशक भी अब धीरे-धीरे वापसी कर रहे हैं।


डिफेंस सेक्टर बना बाजार का हीरो

निवेशक अब दूसरी तिमाही के नतीजों पर नजर रखे हुए हैं, जो अभी तक उम्मीदों से बेहतर रहे हैं।
मझगांव डॉक और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के नतीजों ने डिफेंस सेक्टर में उत्साह बढ़ाया है।
सरकारी ऑर्डर और नए कॉन्ट्रैक्ट्स की उम्मीद में निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स इस साल अब तक 26% की तेजी दर्ज कर चुका है।

आने वाले दिनों में PNB Housing, IOC, Coal India, Adani Power, Dabur, DLF, ITC, Manappuram Finance, BHEL और NTPC जैसी कंपनियों के नतीजे भी बाजार की दिशा तय करेंगे।


क्रूड ऑयल में उछाल और वैश्विक असर

रूस की तेल कंपनियों पर अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के नए प्रतिबंधों के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 5% की बढ़ोतरी हुई है।
इससे वैश्विक सप्लाई पर असर और बढ़ती महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
भारतीय रिफाइनरियां अब रूसी तेल आयात में कमी की तैयारी कर रही हैं, जिससे अमेरिका के साथ ट्रेड डील को बढ़ावा मिल सकता है।


भारत-अमेरिका ट्रेड डील से उत्साह

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर प्रगति की खबरों ने निवेशकों के उत्साह को बढ़ाया है।
हालांकि, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत किसी भी प्रतिबंधात्मक समझौते में जल्दबाजी नहीं करेगा।
अगर यह डील भारत के पक्ष में होती है तो भारतीय निर्यात पर 50% तक टैरिफ में कमी संभव है — जिससे मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात क्षेत्र में बड़ी तेजी आ सकती है।


अमेरिकी महंगाई और फेडरल रिजर्व की उम्मीदें

अमेरिका में जारी ताजा मुद्रास्फीति आंकड़े उम्मीद से कम रहे, जिससे वहां के बाजारों में तेज़ी देखने को मिली।
28 अक्टूबर से शुरू होने वाली फेडरल रिजर्व बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की उम्मीद है।
बाजार दिसंबर और जनवरी में और कटौती की संभावनाओं पर भी नज़र रख रहा है, जो एक सकारात्मक ग्लोबल संकेत है।

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