Adani Enterprises शेयर में तेजी MSCI वेट बढ़ने से ₹202 मिलियन के संभावित इनफ्लो पर नजर
अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में शुक्रवार को मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Adani Enterprises Ltd के शेयर 2.50% बढ़कर ₹3,040 पर बंद हुए। कारोबार के दौरान शेयर ने ₹3,048 का हाई और ₹2,950 का लो बनाया।
शेयर में तेजी का प्रमुख कारण MSCI के अगस्त 2026 इंडेक्स रिव्यू में कंपनी के इंडेक्स वेट में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, इस बदलाव से अडानी एंटरप्राइजेज में करीब 202 मिलियन डॉलर का संभावित पैसिव इनफ्लो आ सकता है। MSCI का यह बदलाव 31 अगस्त के कारोबार के बाद लागू होगा।
हालांकि, MSCI वेट बढ़ने को सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन संभावित इनफ्लो को सीधे तौर पर शेयर की कीमत में आने वाली निश्चित तेजी नहीं समझना चाहिए।
MSCI इंडेक्स में बदलाव क्यों है महत्वपूर्ण?
MSCI इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड अपने पोर्टफोलियो को इंडेक्स में कंपनियों के नए वेट के अनुसार एडजस्ट करते हैं। इसलिए अडानी एंटरप्राइजेज का इंडेक्स वेट बढ़ने से संस्थागत मांग में इजाफा हो सकता है।
नुवामा के अनुमान के अनुसार करीब 202 मिलियन डॉलर का संभावित पैसिव इनफ्लो देखने को मिल सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि पूरी रकम एक ही कारोबारी दिन में शेयर में आए। इंडेक्स बदलाव की तारीख नजदीक आने के साथ इसका असर धीरे-धीरे भी दिखाई दे सकता है।
Q1 FY27 में अडानी एंटरप्राइजेज का प्रदर्शन
MSCI से अलग कंपनी के कारोबार में भी पिछले कुछ महीनों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। जून तिमाही में अडानी एंटरप्राइजेज की कुल आय 50% बढ़कर ₹33,546 करोड़ रही।
कंपनी का EBITDA भी 49% बढ़कर ₹5,642 करोड़ हो गया, जो कंपनी का अब तक का सबसे ऊंचा तिमाही EBITDA रहा।
हालांकि, ₹2,644 करोड़ के OFAC सेटलमेंट से जुड़े असाधारण खर्च के कारण कंपनी को तिमाही में ₹1,160 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस हुआ।
एयरपोर्ट बिजनेस बना बड़ा ग्रोथ इंजन
अडानी एंटरप्राइजेज के लिए एयरपोर्ट कारोबार लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। जून तिमाही में इस सेगमेंट की आय 39% बढ़कर ₹3,763 करोड़ रही।
वहीं, एयरपोर्ट कारोबार का EBITDA 49% बढ़कर ₹1,633 करोड़ हो गया। इससे कंपनी के इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो में एयरपोर्ट बिजनेस की बढ़ती भूमिका दिखाई देती है।
रोड बिजनेस में भी बढ़ रहा ऑपरेशनल योगदान
कंपनी के रोड कारोबार में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। गंगा एक्सप्रेसवे पर 15 मई से टोल कलेक्शन शुरू हो चुका है।
इसके अलावा अडानी एंटरप्राइजेज ने 620.6 लेन किलोमीटर का नया ऑपरेशनल BOT प्रोजेक्ट जोड़ा है, जो NH-59 के जरिए इंदौर को मध्य प्रदेश-गुजरात सीमा से जोड़ता है।
इस तरह कंपनी के पहले किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश अब धीरे-धीरे ऑपरेशनल आय और कैश फ्लो में योगदान देना शुरू कर रहे हैं।
कॉपर बिजनेस का बढ़ता योगदान
कॉपर कारोबार भी अडानी एंटरप्राइजेज के लिए तेजी से महत्वपूर्ण बन रहा है। जून तिमाही में कॉपर की बिक्री 11.5 हजार टन से बढ़कर 64.7 हजार टन हो गई।
इस सेगमेंट ने तिमाही में ₹749 करोड़ का EBITDA दिया। यानी कॉपर बिजनेस अब केवल भविष्य की योजना नहीं है, बल्कि कंपनी के मौजूदा वित्तीय प्रदर्शन में भी योगदान दे रहा है।
न्यू एनर्जी बिजनेस में क्षमता विस्तार
न्यू एनर्जी सेगमेंट में कंपनी ने जून में 1.7 GW की नई सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग लाइन शुरू की। इसके बाद कंपनी की कुल मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़कर 5.7 GW हो गई।
हालांकि, Q1 FY27 में इस कारोबार का EBITDA सालाना आधार पर 20% घटकर ₹972 करोड़ रहा। इसलिए क्षमता विस्तार के साथ-साथ आने वाली तिमाहियों में मार्जिन और कमाई की रफ्तार भी महत्वपूर्ण होगी।
डेटा सेंटर बिजनेस पर भी नजर
अडानी एंटरप्राइजेज के डेटा सेंटर कारोबार में भी विस्तार जारी है। कंपनी ने 400 MW का नया हाइपरस्केल ऑर्डर हासिल किया है। इसके बाद AdaniConneX की कुल टाई-अप क्षमता 960 MW से अधिक हो गई है।
पुणे में अतिरिक्त क्षमता शुरू होने के बाद कंपनी की ऑपरेशनल क्षमता 65.4 MW तक पहुंच गई। AI और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए डेटा सेंटर कारोबार को कंपनी के लंबी अवधि के ग्रोथ प्लेटफॉर्म में से एक माना जा सकता है।
₹15,000 करोड़ का QIP भी पूरा
अडानी एंटरप्राइजेज ने पिछले तीन महीनों में करीब ₹15,000 करोड़ का QIP भी पूरा किया है। कंपनी के अनुसार, QIP को बेस इश्यू साइज की तुलना में 3.8 गुना से ज्यादा बोलियां मिलीं और घरेलू तथा वैश्विक संस्थागत निवेशकों ने इसमें भाग लिया।
इससे कंपनी को एयरपोर्ट, रोड, न्यू एनर्जी, कॉपर और डेटा सेंटर जैसे कारोबारों में आगे निवेश के लिए पूंजी जुटाने में मदद मिली है।
Adani Enterprises Share आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर में हालिया तेजी के पीछे MSCI वेट बढ़ोतरी और संभावित पैसिव इनफ्लो प्रमुख ट्रिगर हैं। इसके अलावा कंपनी के एयरपोर्ट, रोड, कॉपर, न्यू एनर्जी और डेटा सेंटर कारोबार में विस्तार की कहानी भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, निवेशकों को केवल MSCI से मिलने वाले संभावित इनफ्लो पर निर्भर रहने के बजाय कमाई, मार्जिन, कैश फ्लो, नए कारोबारों की profitability और वैल्यूएशन पर भी नजर रखनी चाहिए।
