बाजार में गिरावट, फिर भी Foreign Investors ने बढ़ाया निवेश
अगस्त 2026 में भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली, लेकिन विदेशी निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक लौटता नजर आया।
Foreign Portfolio Investors (FPI) ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में $3.2 बिलियन से ज्यादा का निवेश किया। यह सितंबर 2024 के बाद किसी एक महीने में FPI का सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है।
खास बात यह रही कि अगस्त के दौरान दोनों प्रमुख benchmark indices में 1% से ज्यादा की गिरावट आई, इसके बावजूद विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी करते रहे।
16 से 31 अगस्त के दौरान भी FPI लगातार दूसरी पखवाड़े Net Buyers रहे। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में विदेशी निवेशकों ने कुल 10 sectors में निवेश किया।
Consumer Services में सबसे ज्यादा FPI Investment
16 से 31 अगस्त के बीच विदेशी निवेशकों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी Consumer Services sector में रही।
इस 15 दिन की अवधि में sector में करीब ₹5,019 करोड़ का FPI investment आया।
इसके साथ अगस्त में Consumer Services sector में कुल FPI investment बढ़कर ₹8,417 करोड़ हो गया।
इससे पहले जुलाई में भी विदेशी निवेशकों ने इस sector में करीब ₹10,191 करोड़ का निवेश किया था।
अगर पिछले तीन महीनों को एक साथ देखें तो Consumer Services sector में FPI का कुल investment करीब ₹19,787 करोड़ रहा।
क्यों आकर्षित हो रहे हैं Foreign Investors?
SBI Securities के मुताबिक, लोगों के spending pattern में बदलाव Consumer Services sector में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी की एक वजह हो सकता है।
Disposable Income बढ़ने के साथ consumers सिर्फ जरूरी सामान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि premium और high-end products पर भी खर्च कर रहे हैं।
इस trend का फायदा:
- High-end Fashion
- Luxury Cosmetics
- Premium Organised Retail
- Travel & Tourism
- Premium Restaurants
- Hotels और Hospitality
जैसे segments को मिल सकता है।
इससे बदलती economic conditions के बावजूद Consumer Services sector की growth को support मिल रहा है।
Financial Services दूसरे नंबर पर
FPI investment पाने के मामले में Financial Services sector दूसरे स्थान पर रहा।
16 से 31 अगस्त के दौरान विदेशी निवेशकों ने इस sector में ₹4,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया।
जून से अगस्त के बीच Financial Services sector में कुल FPI investment करीब ₹16,570 करोड़ रहा।
SBI Securities के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की दोबारा खरीदारी यह संकेत देती है कि sector में पहले दिखाई दे रहा selling pressure कुछ कम हुआ है और investors धीरे-धीरे अपनी holdings बढ़ा रहे हैं।
इससे पहले मार्च से मई के बीच Financial Services sector से करीब ₹12,303 करोड़ की निकासी हुई थी।
Healthcare Sector में भी FPI की मजबूत खरीदारी
Healthcare sector में भी अगस्त के दूसरे पखवाड़े में विदेशी निवेशकों की अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
16 से 31 अगस्त के दौरान इस sector में करीब ₹3,021 करोड़ का FPI investment आया।
जून से अगस्त की अवधि में Healthcare sector में कुल FPI investment करीब ₹12,076 करोड़ रहा।
SBI Securities के मुताबिक, Divis Laboratories, Glenmark Pharmaceuticals, Ipca Laboratories, Laurus Labs, PPL Pharma और Zydus Lifesciences जैसे stocks में positive price-action structure दिखाई दे रहा है।
हालांकि किसी भी stock में निवेश का निर्णय केवल price action के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
Telecom Sector से FPI की बड़ी निकासी
जहां कुछ sectors में विदेशी निवेशक खरीदारी कर रहे थे, वहीं Telecom sector में उनका रुख काफी कमजोर रहा।
अगस्त 2026 में FPIs ने Telecom sector से करीब ₹4,983 करोड़ की निकासी की।
जनवरी से जारी selling के चलते 2026 में अब तक Telecom sector से FPI की कुल निकासी करीब ₹29,513 करोड़ हो चुकी है।
Telecom Sector पर क्यों बढ़ रहा दबाव?
Telecom companies के लिए 5G network expansion और spectrum renewal पर होने वाला भारी capital expenditure एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इससे कंपनियों के Free Cash Flow पर दबाव बढ़ सकता है।
वहीं, ARPU यानी Average Revenue Per User में बढ़ोतरी के जरिए 5G से होने वाली वास्तविक monetisation भी अपेक्षाओं की तुलना में धीमी रहने की चिंता है।
इस वजह से विदेशी निवेशकों की sector में दिलचस्पी फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही है।
Power Sector में भी FPI Selling जारी
Power sector में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही।
अगस्त 2026 में FPIs ने Power sector से करीब ₹2,641 करोड़ निकाले।
इससे पहले की तीन महीनों की अवधि में भी इस sector से करीब ₹9,956 करोड़ की FPI निकासी हुई थी।
DISCOMs की समस्या बनी चुनौती
Power sector के लिए State Electricity Distribution Companies यानी DISCOMs की financial स्थिति एक बड़ी चिंता बनी हुई है।
DISCOMs पर cash-flow pressure और debt का बोझ बढ़ने से power companies पर भी अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है।
अगर बिजली के tariffs से पर्याप्त revenue नहीं मिलता और government subsidies में देरी होती है, तो power infrastructure के maintenance और modernisation पर होने वाला खर्च प्रभावित हो सकता है।
Power Companies की Cost भी बढ़ रही है
Power companies को सिर्फ demand और DISCOM-related challenges का सामना नहीं करना पड़ रहा है। उनके equipment costs पर भी दबाव बना हुआ है।
ज्यादा import duties और global supply-chain disruptions के कारण:
- Solar Modules
- Wind Turbines
- High-Voltage Transmission Equipment
जैसे जरूरी equipment महंगे हो सकते हैं।
इसके अलावा मौसम में होने वाले अनिश्चित बदलाव भी power sector के लिए चुनौती बढ़ा सकते हैं।
लंबे समय तक बारिश कम रहने या मानसून में असमानता से एक तरफ electricity demand अचानक बढ़ सकती है, जबकि दूसरी तरफ Hydro और Wind Power generation प्रभावित हो सकता है।
ऐसी स्थिति में power companies को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए short-term spot market से महंगी बिजली खरीदनी पड़ सकती है।
FPI Flow से क्या संकेत मिलते हैं?
अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि बाजार में कमजोरी के बावजूद विदेशी निवेशकों ने चुनिंदा sectors में खरीदारी का रुख अपनाया है।
Consumer Services, Financial Services और Healthcare में मजबूत FPI inflow यह दिखाता है कि विदेशी निवेशक हर sector में एक जैसा रुख नहीं अपना रहे हैं। वे earnings potential, consumption trends और sector-specific fundamentals को ध्यान में रखते हुए selective buying कर रहे हैं।
दूसरी तरफ Telecom और Power जैसे sectors में लगातार selling यह बताती है कि कुछ structural challenges अभी भी investors की चिंता बने हुए हैं।
इसलिए केवल overall FPI data देखने के बजाय sector-wise FPI flow को समझना भी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
अगस्त 2026 भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर महीना रहा, लेकिन विदेशी निवेशकों के नजरिए से तस्वीर कुछ अलग दिखाई दी। FPI ने महीने में $3.2 बिलियन से ज्यादा निवेश किया, जो सितंबर 2024 के बाद किसी महीने में सबसे बड़ा investment बताया जा रहा है।
Consumer Services में सबसे ज्यादा खरीदारी हुई, जबकि Financial Services और Healthcare भी विदेशी निवेशकों की पसंद में रहे।
इसके उलट Telecom और Power sectors में selling pressure जारी रहा। इससे साफ है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में लौटते हुए भी selective approach अपना रहे हैं।
आगे FPI flow की दिशा global interest rates, geopolitical developments, भारतीय कंपनियों की earnings और valuations समेत कई factors पर निर्भर करेगी।
