Nifty 50 में असामान्य शांति, क्या जल्द आने वाली है बड़ी चाल? इतिहास दे रहा है Volatility बढ़ने का संकेत

Nifty 50 में असामान्य शांति, क्या जल्द आने वाली है बड़ी चाल? इतिहास दे रहा है Volatility बढ़ने का संकेत

Nifty 50 इन दिनों काफी शांत नजर आ रहा है। अगस्त 2026 में इंडेक्स के 21 ट्रेडिंग सेशन में किसी भी दिन 1% या उससे ज्यादा की तेजी या गिरावट नहीं हुई।

शेयर बाजार में इतनी लंबी अवधि तक सीमित उतार-चढ़ाव आम नहीं माना जाता। इतिहास बताता है कि जब बाजार लंबे समय तक एक संकीर्ण दायरे में कारोबार करता है, तो इसके बाद Volatility बढ़ सकती है।

हालांकि, यहां सबसे अहम बात यह है कि Volatility बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि अगली बड़ी चाल सिर्फ ऊपर की तरफ होगी या सिर्फ नीचे। बाजार की दिशा का अनुमान केवल इस आंकड़े से नहीं लगाया जा सकता।

इतिहास में सिर्फ 8 बार दिखा ऐसा पैटर्न

SAMCO Securities के Equity Research Analyst राज गायकवाड़ ने जनवरी 2000 से अब तक के 6,630 ट्रेडिंग दिनों और 320 कैलेंडर महीनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया।

इस Analysis में सिर्फ 8 महीने ऐसे मिले, जब Nifty में किसी भी दिन 1% या उससे ज्यादा की तेजी या गिरावट नहीं हुई।

यानी अगस्त 2026 का बाजार व्यवहार काफी दुर्लभ है। आंकड़ों के अनुसार, ऐसी स्थिति लगभग हर 40 महीने में एक बार देखने को मिली है।

ऐसे पिछले मौके थे

  • जून 2017
  • जुलाई 2018
  • दिसंबर 2019
  • जून 2021
  • अप्रैल 2023
  • जुलाई 2025
  • सितंबर 2025
  • दिसंबर 2025

खास बात यह है कि जनवरी 2000 से शुरू हुए इस डेटा में पहले 17 वर्षों के दौरान ऐसा एक भी मामला नहीं मिला। सभी 8 मामले 2017 के बाद देखने को मिले।

क्या शांत बाजार के बाद आती है बड़ी चाल?

पुराने आंकड़ों से पता चलता है कि लंबे समय तक बाजार शांत रहने के बाद Nifty में आगे चलकर बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि, यह जरूरी नहीं कि बाजार तुरंत गिर जाए।

पिछले 8 मामलों में एक महीने बाद Nifty का औसत रिटर्न 1.22% रहा। इनमें से 5 मौकों पर Nifty एक महीने बाद बढ़त में था।

इससे संकेत मिलता है कि कम Volatility वाले दौर के बाद तुरंत बड़ी गिरावट आना जरूरी नहीं है।

3 महीने बाद क्या हुआ?

तीन महीने की अवधि में तस्वीर काफी अलग रही।

पिछले 8 मामलों में Nifty का रिटर्न 29.34% की गिरावट से लेकर 12.06% की तेजी तक रहा। यानी बाजार शांत रहने के बाद आगे चलकर इंडेक्स में काफी बड़ा बदलाव देखने को मिला।

इन 8 मामलों में से 6 मौकों पर अगले तीन महीनों में Nifty में 5% से ज्यादा की तेजी या गिरावट देखने को मिली।

इससे यह संकेत मिलता है कि लंबे समय तक सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद बाजार में बड़ी Volatility की संभावना बढ़ सकती है।

अगस्त की शांति को सीधे Bullish या Bearish Signal न मानें

अगस्त में Nifty का शांत रहना अपने आप में न तो तेजी का संकेत है और न ही गिरावट का।

इसका सीधा मतलब यह है कि इंडेक्स कुछ समय से एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है और आगे किसी समय इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

राज गायकवाड़ के मुताबिक, अगस्त 2026 का यह दुर्लभ आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि लंबे समय तक सीमित दायरे में रहने के बाद Nifty में फिर से Volatility बढ़ सकती है।

3 अगस्त की 1.60% चाल क्यों शामिल नहीं?

इस Analysis में 3 अगस्त की 1.60% बाजार चाल को शामिल नहीं किया गया है।

इसके पीछे वजह यह बताई गई है कि यह बदलाव नए Closing Auction Session की शुरुआत से जुड़ा था और Closing Auction के दौरान हुआ था।

इसलिए इसे सामान्य ट्रेडिंग सेशन की Volatility के साथ तुलना नहीं की गई।

अब Index से ज्यादा Earnings पर फोकस?

बाजार में सिर्फ Volatility ही नहीं, बल्कि निवेश की रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।

ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि Nifty ऊपर जा रहा है या नीचे। इसके बजाय यह देखना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है कि:

  • कंपनी की Earnings कितनी तेजी से बढ़ रही है?
  • कंपनी के Financial Results कैसे हैं?
  • शेयर की Valuation कैसी है?
  • कंपनी का शेयर बाजार में कैसा प्रदर्शन कर रहा है?

Axis Securities ने सितंबर की अपनी Investment Strategy में भी Index के स्तर पर निवेश करने के बजाय Earnings के आधार पर Stock Selection पर जोर दिया है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, घरेलू निवेश और उम्मीद से बेहतर Earnings के कारण Broad Market को पहले ही काफी फायदा मिल चुका है। ऐसे में आगे Stock Selection और कंपनी की कमाई बाजार के प्रदर्शन में ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

अगस्त की कम Volatility को देखकर घबराने या किसी एक दिशा में ट्रेड लेने के बजाय निवेशकों को आने वाले दिनों में Price Action, Earnings, Valuation और Risk Management पर ध्यान देना चाहिए।

इतिहास यह जरूर बताता है कि ऐसी शांति के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, लेकिन पिछला पैटर्न यह तय नहीं करता कि अगली चाल ऊपर होगी या नीचे।

इसलिए केवल Volatility के आंकड़े के आधार पर ट्रेडिंग या निवेश का फैसला लेना उचित नहीं होगा।

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