नोएडा-ग्रेटर नोएडा बन रहा है उत्तर भारत का बड़ा हेल्थकेयर हब

नोएडा-ग्रेटर नोएडा बन रहा है उत्तर भारत का बड़ा हेल्थकेयर हब

नोएडा और ग्रेटर नोएडा अब केवल रिहायशी और आईटी हब तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तेजी से उत्तर भारत के प्रमुख हेल्थकेयर केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। बढ़ती आबादी, कॉरपोरेट गतिविधियों का विस्तार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों से आने वाले मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि के कारण इस क्षेत्र में आधुनिक अस्पतालों और सुपर-स्पेशियलिटी हेल्थकेयर सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।

हालांकि, लगातार नए अस्पतालों के निर्माण के बावजूद, पूरे नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में वर्तमान में केवल लगभग 4,500 सुपर-स्पेशियलिटी बेड्स उपलब्ध हैं, जो मौजूदा मांग के मुकाबले काफी कम माने जा रहे हैं।

पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ी आबादी

इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा की जनसंख्या लगभग 5.4% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़कर करीब 13 लाख (1.3 मिलियन) तक पहुंच गई है।

इस तेज जनसंख्या वृद्धि के पीछे कई प्रमुख उद्योगों का विस्तार जिम्मेदार माना जा रहा है, जिनमें शामिल हैं:

  • आईटी सर्विसेज
  • मैन्युफैक्चरिंग
  • इलेक्ट्रॉनिक्स
  • डेटा सेंटर
  • फाइनेंशियल सर्विसेज

इन सेक्टर्स में रोजगार के अवसर बढ़ने से बड़ी संख्या में लोग इस क्षेत्र में बस रहे हैं।

हेल्थकेयर सेवाओं की मांग में लगातार इजाफा

बढ़ती आबादी और बदलती जीवनशैली के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेष रूप से निम्नलिखित मेडिकल सेवाओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है:

  • कार्डियोलॉजी (हृदय रोग)
  • ऑन्कोलॉजी (कैंसर उपचार)
  • डायबिटीज केयर
  • मैटरनिटी सेवाएं
  • पीडियाट्रिक्स
  • क्रॉनिक डिजीज मैनेजमेंट

इसी वजह से नोएडा-ग्रेटर नोएडा का हेल्थकेयर सेक्टर उत्तर भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे अस्पताल बाजारों में शामिल होता जा रहा है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए बन रहा है मेडिकल हब

अब इलाज के लिए आने वाले मरीज केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक सीमित नहीं हैं। बड़ी संख्या में मरीज निम्न क्षेत्रों से भी यहां पहुंच रहे हैं:

  • पूर्वी दिल्ली
  • गाजियाबाद
  • बुलंदशहर
  • अलीगढ़
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य शहर

यह दर्शाता है कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा का हेल्थकेयर इकोसिस्टम पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रमुख मेडिकल सेंटर बनता जा रहा है।

कई सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं की अभी भी कमी

रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में कई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की अभी भी पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। इनमें प्रमुख हैं

  • ऑर्गन ट्रांसप्लांट
  • रोबोटिक सर्जरी
  • एडवांस्ड क्रिटिकल केयर
  • मल्टी-स्पेशियलिटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

यही कारण है कि बड़े अस्पताल समूह अब विशेष चिकित्सा सुविधाओं और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के विकास पर भारी निवेश कर रहे हैं।

मांग की तुलना में अभी भी कम है अस्पतालों की क्षमता

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा में हेल्थकेयर सेवाओं की मांग अस्पतालों की नई क्षमता से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है। इसका अर्थ है कि यह बाजार अभी भी अपने शुरुआती विकास चरण में है और आने वाले वर्षों में इसमें मजबूत विस्तार की संभावना बनी हुई है।

मेदांता को लेकर मोतीलाल ओसवाल का सकारात्मक नजरिया

ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal Financial Services का मानना है कि Medanta के पुराने और नए दोनों अस्पतालों में मरीजों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

ब्रोकरेज के अनुसार कंपनी की ग्रोथ के प्रमुख कारण हैं

  • मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि
  • प्रति मरीज राजस्व में सुधार
  • अस्पताल क्षमता का विस्तार
  • विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में बढ़ोतरी
  • नई सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार

मेदांता फिलहाल अपने प्रमुख अस्पतालों में बेड ऑक्यूपेंसी बढ़ाने और हाई-एंड मेडिकल सुविधाओं के विस्तार पर फोकस कर रही है।

नोएडा अस्पताल FY27 की दूसरी छमाही तक कर सकता है EBITDA ब्रेक-ईवन हासिल

मोतीलाल ओसवाल का अनुमान है कि मेदांता का नोएडा अस्पताल वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (2HFY27) तक EBITDA ब्रेक-ईवन हासिल कर सकता है। इसका मतलब होगा कि अस्पताल की ऑपरेटिंग कमाई उसके ऑपरेटिंग खर्चों के बराबर पहुंच जाएगी, जो भविष्य की लाभप्रदता के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

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