Jaiprakash Associates Deal पर Vedanta vs Adani के बीच टकराव
कॉरपोरेट जगत में एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां Vedanta Resources Ltd और Adani Enterprises के बीच Jaiprakash Associates की डील को लेकर टकराव बढ़ गया है।
इस मामले में Vedanta के चेयरमैन Anil Agarwal ने गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चिंता जताई है।
क्या है पूरा मामला?
Jaiprakash Associates दिवालिया प्रक्रिया (IBC) से गुजर रही थी, जहां कंपनी की बिक्री के लिए बोली लगाई गई।
यह प्रक्रिया Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत Committee of Creditors (CoC) द्वारा public auction के जरिए आयोजित की गई थी।
इसमें कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया, जिनमें Vedanta और Adani Enterprises प्रमुख थीं।
Vedanta का दावा हम थे Highest Bidder
Anil Agarwal के अनुसार
- Vedanta ने करीब ₹16,000 करोड़ की सबसे ऊंची बोली लगाई
- कंपनी को Written Confirmation भी मिला कि वह Winning Bidder है
लेकिन कुछ ही दिनों बाद अचानक यह फैसला बदल दिया गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
अब Vedanta ने इस फैसले को कानूनी चुनौती देने का फैसला किया है।

पुरानी मुलाकात का जिक्र
Agarwal ने इस पूरे मुद्दे को कंपनी के फाउंडर Jaiprakash Gaur से अपनी पुरानी मुलाकात से भी जोड़ा।
उन्होंने बताया कि London में हुई बातचीत में Gaur ने अपने बिजनेस के भविष्य को लेकर चिंता जताई थी और इच्छा जताई थी कि कंपनी सही हाथों में जाए।
हालांकि उस समय Vedanta ने कदम नहीं बढ़ाया, लेकिन insolvency process में फिर मौका मिला।
Bhagavad Gita का हवाला
Anil Agarwal ने इस मामले में Bhagavad Gita का जिक्र करते हुए कहा कि Vedanta इस मुद्दे को बिना किसी attachment के आगे बढ़ाएगी।
उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर लिया गया निर्णय बदला नहीं जाना चाहिए।
Adani Enterprises को मिली मंजूरी
दूसरी तरफ Adani Enterprises को इस डील में आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है।
- National Company Law Tribunal (NCLT) की Allahabad Bench ने 17 मार्च को Adani की bid को approve किया
- कंपनी को Successful Resolution Applicant घोषित किया गया
अब Vedanta Resources Ltd ने इस फैसले को National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) में चुनौती दी है।
Higher Bid के बावजूद Vedanta क्यों हारी?
यह इस केस का सबसे बड़ा सवाल है।
रिपोर्ट्स के अनुसार
- Vedanta की bid ₹16,000 करोड़
- Adani की bid ₹14,535 करोड़
फिर भी CoC ने Adani की योजना को प्राथमिकता दी, इसके पीछे कुछ कारण बताए जा रहे हैं:
1. Higher Upfront Payment
- Adani ने ₹6,000 करोड़ से ज्यादा upfront payment देने की पेशकश की
2. Faster Payment Timeline
- भुगतान की अवधि कम थी, जिससे creditors को जल्दी पैसा मिल सकता था
3. Better Recovery Confidence
- creditors को Adani के प्लान पर ज्यादा भरोसा था
इसी वजह से केवल highest bid ही अंतिम निर्णय का आधार नहीं बना।
अब क्या होगा आगे?
यह मामला अब पूरी तरह से एक legal battle बन चुका है।
- National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) में सुनवाई होगी
- Final फैसला तय करेगा कि डील का outcome क्या होगा
निष्कर्ष
Vedanta vs Adani का यह विवाद केवल एक कॉरपोरेट डील नहीं, बल्कि IBC प्रक्रिया की transparency और decision-making पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
